Skip to main content

कुछ होने का इंतज़ार कर रहा हूँ।

कुछ होने का इंतज़ार कर रहा हूँ।

उसी तरह जैसे माँ,
हर पल राह देखती है मेरी,
ज़रा सी देरी पर।

उसी तरह जैसे,
बच्चे सुबह इंतज़ार करते है,
स्कूलबस  का।

जैसे कोई मुसाफिर,
अपनी थकी आँखें जमाये रखता है ,
मंज़िल के इंतज़ार में ।

जैसे कोई विद्यार्थी,
इंतज़ार करता है,
नतीजों का ।

जैसे लोग देखते है किसी करतबी को,
चलते हुए रस्सी पर,
नज़र लगाये रहते है,
उसके मंजिल पर पहुचने तक।

Comments

  1. प्रतीक्षा होती है हमें तो अपनों की ,

    उन स्वप्नों की जो होते हैं अकसर

    साकार होने की दहलीज के पास ,

    घड़ी की जो ला सकती परिवर्तन ,

    उठाकर खड़ा कर सकती यकायक

    आप को जमीन से आसमान तक

    बुरे वक्त की प्रतीक्षा करता कौन

    उनके याद आने पर होता व्याकुल

    प्राय: साध लेता हर व्यक्ति मौन।

    ReplyDelete

Post a Comment

Reactions are encouraging!
Have your say!
(You can comment using facebook plugin as well)