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क्या हर ज़िन्दगी एक जैसी होती है?

A poetry after a really long time. Its about how different our lives are despite being so similar. Do give it a read. क्या हर ज़िन्दगी एक जैसी होती है? सांसें में भी ले रहा हूँ, साँसे तुम भी ले रहे हो हवा भी वही है लगभग, क्या तुम भी वैसे ही जी रहे हो? क्या हर ज़िन्दगी एक जैसी होती है? महज़ जिंदा रहना ही, क्या जीना होता है? हालात  अलग, तजुर्बे अलग, तो सोच की बनावट अलग, यूँही तो नहीं नजरिया अलग होता है क्या हर ज़िन्दगी एक जैसी होती है? तो क्या हर ज़िन्दगी, मुख्तलिफ है? दर्द मुझे भी होता है, दर्द तुम्हें भी होता है| मुस्कराहट मेरे पास भी है, हँसना तुम भी जानते हो| दिन और रात के झूले में, तुम भी झूलते हो और मैं भी| पर कुछ एक जैसा होने से, सब कुछ एक जैसा होना ज़रूरी तो नहीं| अगर हर ज़िन्दगी एक जैसी होती तो, तुम्हें 'तुम' कहने और मुझे 'मैं' कहने की क्या ज़रूरत पढ़ती?

देश मेरा|

आज़ाद   हवा की खुशबू ही कुछ और होती है | चाहे जितनी खामियां हों, चाहे जितने मतभेद हों , सब अपने से लगते है | मेरा मुल्क चाहे अमीर न हो, मेरा मुल्क मेरा है, यही अमीरी काफी है| मेरे देश का किसान, भूखा रहता है, पर भूखा नहीं रहने देता मुझे| मेरे देश का जवान, गोलियों की आँधियों को झेलता है, पर मेरा बाल भी बांका नहीं होने देता| यही बलिदान और निस्वार्थता के संस्कारों से मुझे पोषित किया गया है| भ्रष्टाचार के वायरस ने, कुछ मुझपर भी हमले किये, पर शुक्रगुज़ार हूँ, की उन शहीदों से मिली प्रेरणा का टिका मुझे लगा हुआ था| जय हिंद| जय भारत| Ask not what your country can do for you, ask what you can do for your country.                                                         -JFK Happy Independence day!