Experiencing Life...

Live..Learn..Think


Waqt ki kashti...

A poem on life in general, treating time as a travel on boat..

वक़्त की कश्ती में संवार
होकर चलें  जा रहा हूँ ...
वहीँ  से ही इस जहाँ को निहारते
जा रहा हूँ ।

जब किनारा छोड़ा था
नासमझ बेफिक्र सा था ।
आज बी खुद को
समझदार नहीं कह सकता ।

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