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कुछ जानने निकल जाता हूँ..

Posting after a long long time. This poem is an expression of  my passion to listen people and talk to people, who have something in common, it can be a common profession, hobby or just the mutual urge to know each other. This poetry is actually a reason behind attending conferences, meetups and poetry sessions, despite being a not-so-social guy.

आराम सहा नहीं जाता मन से,
तो कुछ जानने निकल जाता हूँ|

घर के सुकून से निकलकर,
कोई जूनून ढूंढने निकल जाता हूँ|

यूँ तो ख्यालों की आबादी काम नहीं मेरे जहां में,
फिर भी औरों के सुनने चला जाता हूँ|

सोच उतनी ही होती है, जितने में वो कैद रहती है,
उस सोच को अक्सर आज़ाद करने निकल जाता हूँ|

अक्सर मतभेदों से मुलाक़ात होती है, 
कभी वक़्त जाया करते हैं,
कभी उन्हें अपनाने को मजबूर हो जाता हूँ|

मैं बातें करने के लिए जाना नहीं जाता,
और सुननेवालों को जानता ही कौन है,
व्यापारी हूँ सच्चा, कुछ कहे बिना,
बहुत कुछ सुन समेट लाता हूँ|




आराम सहा नहीं जाता मन से,
तो कुछ जानने निकल जाता हूँ|

ज़िन्दगी की जद्दोजहद तो चलती रहेगी।

ज़िन्दगी की जद्दोजहद तो चलती रहेगी।

रोज़ वही सांसें लेकर, 
ऊब नहीं जाते?
कभी हवा बदल कर देखिये,
सांसें नई सी लगेंगी।
बाकी, 
ज़िन्दगी की जद्दोजहद तो चलती रहेगी।  

हर रोज़ रात को सोना, सुबह उठना,
कितना नीरस लगता है ।
कभी नींद को टालकर देखो,
तारों की सांगत अच्छी लगेगी
बाकी, 
ज़िन्दगी की जद्दोजहद तो चलती रहेगी।   

२ हफ़्तों की ड्यूटी के  बाद,
चाँद भी आराम फ़रमाता है । 
कुछ पल चुराके, ज़रा सुस्ता लो,
अंगड़ाइयां अच्छी लगेंगी । 
बाकी, 
ज़िन्दगी की जद्दोजहद तो चलती रहेगी। 

"मेरा  काम अहम है,
यह छुट्टियां फ़िज़ूल है उसके आगे । "
 ऐसे ख्याल जो ज़हन में आता हो,
तो आराम आपके लिए है, और भी ज़रूरी  । 
बाकी, 
ज़िन्दगी की जद्दोजहद तो चलती रहेगी।

याद है? वो गर्मी की छुट्टियां,
उतनी लम्बी ज़मानत तो नहीं मिल सकती । 
अर्ज़ियाँ बेहिचक दायर कीजिए ,
छोटी मोटी राहतें तो मिलती रहेगी । 
बाकी, 
ज़िन्दगी की जद्दोजहद तो चलती रहेगी।



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